Indian Redcross Society, Raigarh District Branch (Chhattisgarh)

Collector & District Magistrate, District Raigarh, Smt. Shammi Abidi
Collector & District Magistrate
Chairman, Indian Redcross Society,
Raigarh District Branch (C.G.)
Smt. Shammi Abidi
IPS - Shri Deepak Kumar Jha
Superintendent Of Police, Raigarh
Member , Indian Redcross Society,
Raigarh District Branch (C.G.)
Shri Deepak Kumar Jha
CEO ZP - Smt Chandan Sanjay Tripathi
Chief Ex. Officer,
Jila Panchayat, Raigarh
Vice Chairman, Indian Redcross Society,
Raigarh District Branch (C.G.)
Smt. Chandan Sanjay Tripathi
Raigarh CMHO Dr. Tondar
Chief Medical & Health Officer, Raigarh
Secretary, Indian Redcross Society,
Raigarh District Branch (C.G.)
Dr. T. K. Tonder

रेडक्रास का जन्म

रेडक्रास का जन्म सन् 1859 में सोलफेरिनो के युद्ध की राख से हुआ। यह युद्ध इटली में फ्रेंच और आस्ट्रीयन योद्धाओं के मध्य हुआ था। इस युद्ध में करीब 6 लाख योद्धाओं ने भाग लिया था। युद्ध के समाप्ति के पश्चात युद्ध भुमि में करीब 40 हजार बीमार, घायल और मरते हुए योद्धा जिन्हे उनके भाग्य के भरोसे छोड़ दिया गया था, युद्ध भुमि में अपनी मौत की राह देख रहे थे। उस समय एक स्विस नागरिक जीन हेनरी ड्यूनांट जो अपनी यात्रा पर उस ओर से गुजर रहे थे, योद्धाओं को खराब हालात में देखा। तब हेनरी ड्यूनांट ने अपनी यात्रा स्थगित कर वहाँ एक राहत समिति आयोजित की ओर बीमार तथा घायल मरीजों की सेवा सुश्रुषा की।

हेनरी ड्यूनांट ने इसके पश्चात अपने गृह नगर ‘जिनेवा‘ लौट आये और उन्होने एक पुस्तक ‘मेमोरी आफ सोल फेरिनो‘ लिखी । इस पुस्तक में अत्यंत ईमानदारी और स्पष्टता के साथ युद्ध के सभी चित्रण और युद्ध से होने वाली खराबियों का वर्णन किया गया था। यह पुस्तक सन् 1862 में प्रकाशित हुई और पूरे विश्व में पढ़ी गई। सिर्फ इतना ही नहीं इस पुस्तक में सर हेनरी ड्यूनांट ने कुछ राह उपायों की भी चर्चा की जिनमें से दो को पूरे संसार में काफी जय जयकार प्राप्त हुई:-

  1. सभी देशों में राहत समितियां बनायी जाय जो चिकित्सा सेवा करें और युद्ध के समय राहत कार्य करें।
  2. एक अन्तराष्ट्रीय कानून बनाया जाय जो घायल मरीजों और योद्धाओं का बचाव करें।

अक्टूबर 1863 में अन्तराष्ट्रीय सम्मेलन जिनेवा में हुआ जिसमें 14 राष्ट्रों ने हिस्सा लिया और हेनरी ड्यूनांट के प्रस्ताओं पर विचार किया गया और इसके एक साल बाद ही पुनः 12 राष्ट्रों ने अगस्त 1864 में जिनेवा में बैठक ली। यह बैठक प्रथम जिनेवा सम्मेलन तथा मदर कनवेंसन के नाम से प्रसिद्ध है। यह विश्व की प्रथम रेडक्रास बैठक मानी जाती है।

रेडक्रास – चिन्ह

रेडक्रास का चिन्ह हम देखते हैं कि यह एक लाल धन का निशान है जो कि सफेद सतह पर उभरा हुआ है। यह चिन्ह हमें स्विस के झंडे से प्राप्त हुआ है।

रेडक्रास के उद्देश्य

 

  1. मानव पीड़ा को कम करना।
  2. स्वास्थ्य में सुधार।
  3. रोगों की रोकथाम
  4. मानव जाति में एक दुसरे के प्रति आदर भाव

रेडक्रास के सिद्धान्त

रेडक्रास के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये गाइड लाइन के रूप् में सात सिंद्धान्त बनाये गये हैं जो निम्न प्रकार हैं:-

(1) मानवता

हमें आपसी समझ, मित्रता, सहयोग बढ़ाना और सभी लोगों में शांति का प्रचार करने की इच्छा से उत्पन्न हुआ है। राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय स्तर पर जहां कही भी हो सके, मानव पीड़ा को कम करना है। इसका उद्देश्य है जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा करना और मानव में एक दूसरे के प्रति आदर की भावना जागृत करना। रेडक्रास बढ़ाता है आपसी समझ, मित्रता, सहयोग तथा सभी लोगों में स्थाई शांति।

(2) निष्पक्षता

यह राष्ट्रीयता, जातीयता, धार्मिक विश्वासों, वर्ग या राजनैतिक विचारधाराओं में बिना कोई फर्क किये सर्वाधिक पीड़ित को सबसे पहले राहत पहुँचाने के सिद्धान्त पर कार्य करती है।

(3) तटस्थता

सबके विश्वास को बनाये रखने के लिए इसकी गतिविधियां कभी भी राजनैतिक, धार्मिक या आर्दश स्वभाव में व्यस्त नहीं होगी।

(4) स्वतंत्रता

अपने-अपने राष्ट्र के कानूनों की रक्षा करते हुए मानव सेवा के कार्यों को स्वतंत्र रूप से करेंगे और इस योग्य रहेंगे कि वे रेडक्रास के सिद्धान्तों का पालन हर समय कर सके।

(5) स्वैच्छिक सेवा

किसी भी दशा में प्राप्ति की इच्छा को बढ़ावा नहीं देना है।

यह एक स्वैच्छिक सहायता सेवा है।

(6) एकता

पूरे राष्ट्र के सिर्फ एक ही रेडक्रास होगी और वह सभी के लिये खुली होगी और अपने पूरे क्षेत्र में मानवता के कार्य करेंगी।

(7) विश्व व्यापकता

अन्तराष्ट्रीय रेडक्रास गतिविधियां जिसमें सभी संस्थायें बराबर स्थिति में समान हिस्सेदार तथा समान जिम्मेदारी तथा कर्तव्य का निर्वहन करेंगी और एक दूसरी को मदद करेंगी। यह विचार विश्व व्यापक है।

“ रेडक्रास का जन्म मानव पीड़ा को कम करने की इच्छा से उत्पन्न हुआ है ”

कार्यकारिणी सदस्यों की सूची
क्रमांक नाम पदनाम
1 कलेक्टर रायगढ़ अध्यक्ष
2 पुलिस अधीक्षक, रायगढ़ सदस्य
3 मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत रायगढ़ उपाध्यक्ष
4 मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रायगढ़ सचिव
5 डॉ हबेल सिंह उरांव प्रभारी अधिकारी एवं पूर्व सचिव
6 श्री संतोष अग्रवाल पूर्व अध्यक्ष / संरक्षक सदस्य
7 श्री राकेश जिंदल संरक्षक
8 श्री सागरमल अग्रवाल सदस्य
9 वन मंडलाधिकारी रायगढ़ सदस्य
10 आयुक्त नगर पालिक निगम रायगढ़ सदस्य
11 सिविल सर्जन जिला चिकित्सालय रायगढ़ मानसेवी कोषाध्यक्ष
12 कार्यपालन अभियंता लोक निर्माण विभाग रायगढ़ सदस्य
13 जिला शिक्षा अधिकारी रायगढ़ सदस्य
14 महाप्रबंधक उद्योग एवं व्यापार केंद्र रायगढ़ सदस्य
15 उप संचालक समाज कल्याण रायगढ़ सदस्य
16 श्री राजकुमार गोयल सदस्य
17 श्री सुगमचंद्र फरमानिया सदस्य
18 श्री संतोष टिबरेवाल सदस्य
19 डॉ राजेश अग्रवाल सदस्य
20 प्रो. अम्बिका वर्मा सदस्य
21 श्री नंद किशोर अग्रवाल (चेंबर सारंगढ़) सदस्य
22 श्री कमल गर्ग (खरसिया) सदस्य

रेडक्रास की गतिविधियाँ

  1. रक्तदान शिविरों का आयोजन
  2. रेडक्रास दवा दुकान
  3. रेडक्रास एम्बुलेंस सेवा
  4. वृद्धाश्रम का संचालन
  5. जिला विकलांग एवं पुनर्वास केंद्र का संचालन
  6. लावारिस शवों का ससम्मान कफन-दफन।

उपलब्ध सेवाएँ

  1. आक्सीजन सिलेंडर
  2. व्हील चेयर
  3. वाटर बेड
  4. एयर बेड
  5. स्ट्रेचर

भारत में जुनियर रेडक्रास

भारतीय रेडक्रास सोसायटी ने जुनियर रेडक्रास के कार्यों को 1925 में ग्रहण कर लिया। सर्वप्रथम 1926 में पंजाब ने जुनियर रेडक्रास ने युवा पंजाबियों को साथ लेकर रेडक्रास की गतिविधियों को तेजी से बढ़ावा दिया।

उद्देश्य एवं सिद्धान्त

जुनियर रेडक्रास, रेडक्रास की युवा शाखा है। इसे रेडक्रास की गतिविधियों को बढ़ावा देने और शांति स्थापित करने की संस्था के रूप में जाना जाता है, ताकि स्कूलों, काॅलेजों के छात्र-छात्राओं के द्वारा इसमें अपने अध्ययन काल में मानवतावादी कार्य करके अच्छे नागरिक बनने में भागीदारी प्राप्त कर सकें।

इसके मुख्य उद्देश्य है

  1. स्वास्थ्य में सुधार
  2. पीड़ित मानवता की सेवा तथा
  3. विश्व में भाईचारे की स्थापना

इसके दो आधारभूत सिद्धान्त है

  1. अध्यापक को प्राकृतिक सलाहकार के रूप में मानते हुये विद्यालय की कार्य-प्रणाली के आधार पर जुनियर रेडक्रास के अन्तर्गत काम करना और
  2. अपने पैतृक संस्था रेडक्रास के प्रति पूरी तरह ईमानदार एवं समर्पित रहना।